Yahoo क्या है और याहू को किसने बनाया है?

आपने इंटरनेट कंपनी याहू का नाम जरूर सुना होगा। आज से करीब 21 वर्ष पहले याहू इंटरनेट का दूसरा नाम हुआ करता था। बहुत मुमकिन है कि आपने भी अपना पहला ई मेल अकाउंट याहू पर ही बनाया होगा। याहू के चैटरूम और याहू मैसेंजर कभी दुनिया के सबसे बड़े सोशल नेटवर्किंग प्लैटफॉर्म हुआ करते थे।

ज़्यादातर लोगों के कंप्यूटर्स पर याहू का ही होमपेज हुआ करता था यानी तब इंटरनेट में जाने के लिए आप याहू वाली खिड़की का इस्तेमाल करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है अब याहू ज़्यादातर लोगों की यादों का हिस्सा बनकर रह गया है। याहू एक कंपनी के तौर पर खुद को वक्त के साथ बदल नहीं पाई और अब यह कंपनी बहुत ही सस्ते दामों पर बिक चुकी है।

याहू क्या है

Yahoo एक Search Engine है जिस पर कुछ भी सर्च किया जा सकता है, Yahoo Search Engine के अलावा Calendar, News, Images, Finance, Gadget, Real State, Yahoo Mail, Music, Sports, Movies इसके अलावा और कई सारी सेवाएं प्रदान करता है। Yahoo का full form है “Yet Another Hierarchical Officious Oracle “

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Yahoo की स्थापना

जेरी यांग और डेविड फिलो ने जनवरी 1994 में Jerry’S Guide To The World Wide Web नाम की कम्पनी की स्थापना किया था फिर 3 महीने बाद इसका नाम बदल कर Yahoo रख दिया गया , और फिर कुछ ही वर्षों में याहू इंटरनेट की दुनिया की सबसे कामयाब कंपनियों में से एक बन गई लेकिन आज के हालात ये है।

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याहू के फेल होने की असली वजह क्या है

इसके बारे में हम आपको बताएंगे क्योंकि याहू की कहानी जानने के बाद आप अपने जीवन और अपने करियर के बारे में नई दृष्टि से सोच पाएंगे और दूसरों की गलतियों से सबक लेकर आप अपने जीवन में फेल होने से बच सकते हैं। अंग्रेजी के एक बहुत मशहूर कहावत है “जैक फॉल ट्रेड्स मास्टर ऑफ प्लान” यानी एक ऐसा व्यक्ति जिसे काम तो बहुत सारे आते हैं लेकिन वो किसी भी काम का विशेषज्ञ नहीं होता। याहू पर भी ये कहावत बिल्कुल फिट बैठती है।

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याहू को अमेरिका की बड़ी टेलीकॉम कंपनी वेरिजॉन करीब 32 हजार करोड़ रुपए में खरीद लिया है। एक साथ कई तरह के कारोबार शुरू करके याहू को कॉल रेट्स तो बन गई लेकिन ये कंपनी किसी भी एक काम में अपनी विशेषज्ञता साबित नहीं कर पाई। वर्ष 2000 में याहू की कीमत 125 बिलियन डॉलर यानी आठ लाख 30 हजार करोड़ रुपए थी।

Google खरीदने का मौका भी गंवा दिया

आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्ष 2002 में तो याहू ने इंटरनेट की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक गूगल को खरीदने के लिए तीन बिलियन डॉलर यानी 20 हजार करोड़ रुपए का ऑफर दिया था। लेकिन तब गूगल ने याहू से 5 बिलियन डॉलर यानी करीब 33 हजार करोड़ रुपए मांगे थे और ये डील टूट गई जिसके बाद याहू ने गूगल को खरीदने से इनकार कर दिया था।

Facebook खरीदने का मौका भी गंवा दिया

इसी तरह सन 2006 में याहू के पास फेसबुक को भी खरीदने का मौका था लेकिन याहू फेसबुक की कीमत को पहचान नहीं पाई। आपको जानकर हैरानी होगी कि आज सिर्फ 32 हजार करोड़ रुपए में बिक चुका याहू गूगल और फेसबुक के मुकाबले बहुत छोटी कंपनी बनकर रह गई है। एक जमाने में याहू इन दोनों ही कंपनियों को खरीदना चाहती थी। आज गूगल की ब्रैंड वैल्यू ही याहू के मुकाबले करीब 46 गुना ज्यादा है। फोर्ब्स मैगजीन के मुताबिक इस वक्त गूगल की ब्रैंड वैल्यू 20750 करोड़ डॉलर यानि करीब 15.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।

Microsoft का ऑफर भी ठुकरा दिया

इसके अलावा 2008 में माइक्रोसॉफ्ट ने 44 बिलियन डॉलर यानी करीब 2 लाख 95 हजार करोड़ रुपए में याहू को खरीदने का प्रस्ताव दिया था लेकिन तब याहू ने इस ऑफर को ठुकरा दिया था और आज याहू खुद 2008 के मुकाबले 9 गुना कम कीमत “32 हजार करोड़ रुपए” में बिक चुकी है।

याहू के इस पतन की सबसे बड़ी वजह क्या है

वक्त के साथ खुद को ना बदल पाना सन 2000 के बाद इंटरनेट की दुनिया तेजी से बदलने लगी लेकिन याहू ने वक्त के साथ खुद को नहीं बदला और जिस वक्त इंटरनेट कंपनियां सोशल मीडिया और मोबाइल फोन की ताकत को पहचान कर अपने ग्राहकों को नए नए प्लैटफॉर्म्स दे रही थीं याहू अपने पुराने तौर तरीकों से ही काम करती रही। याहू की नाकामयाबी के पीछे कुछ और बड़े कारण भी हैं। इनमें से सबसे बड़ी वजह है याहू में अच्छी लीडरशिप का अभाव पिछले 21 वर्षों में याहू में सात सीईओज बदले जा चुके हैं।

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याहू की सीईओ “Marissa Mayer” मैरिसा मेयर को याहू के पतन के लिए मुख्य तौर पर जिम्मेदार माना जा है। मैरिसा मेयर ने वर्ष 2012 में याहू को Join किया था। मेरिसा के कार्यकाल में याहू को 2015 में 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ था लेकिन आपको जानकर आज बहुत हैरानी होगी कि इस कंपनी के खराब प्रदर्शन की सजा मैरिसा मेयर को नहीं मिला। आजकल प्राइवेट सेक्टर में सीईओज की सैलरी कंपनी के परफॉर्मेंस से लिंक्ड होती है। यानी कंपनी जैसा परफॉर्म करेगी सीईओ की सैलेरी वैसी ही होगी।

लेकिन मेरिसा मेयर की सैलरी का सिर्फ 3% हिस्सा ही कंपनी के परफॉर्मेंस से लिंक था। आप ये भी कह सकते हैं कि जिसने अपने नेतृत्व में पूरी कंपनी को डुबो दिया उसकी जेब पर इसका कोई खास असर पाड़ा हो या नहीं पाड़ा हो लेकिन उनकी नाकामी हमें यह शिक्षा देती है कि जब किसी जगह पर नई सोच को प्राथमिकता नहीं दी जाती तो वो जगह जल्द ही इतिहास का हिस्सा बन जाती है। सिर्फ यही नहीं दुनिया की कई बड़ी कंपनियां जब समय के साथ खुद को बदल नहीं पाए तो उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।

ब्रिटिश लेखक जॉर्ज बर्नार्ड शॉ “George Bernard Shaw” ने कहा था “Progress is impossible without change, and those who cannot change their minds cannot change anything” यानी बदलाव के बिना तरक्की हासिल नहीं की जा सकती और जो लोग वक्त के साथ अपने सोचने का तरीका नही बदल पाते वो कुछ भी नहीं बदल सकते यानी वो कुछ भी नया नहीं कर सकते हम आपसे यही कहना चाहते हैं कि बदलाव प्रकृति का नियम है।

इसलिए नए तरीके से सोचिए नए आइडियाज पर काम कीजिए नए लोगों से मिलिए नई सोच अपनाइए ये सब करने के लिए आपके पास किसी बड़े गोल यानी बड़े उद्देश्य का होना जरूरी नहीं है क्योंकि जीवन को छोटे छोटे बदलावों से भी सुखद और मंगलमय बनाया जा सकता है। होना यह चाहिए कि आपके पास एक उद्देश्य होना चाहिए चाहे वो उद्देश्य बड़ा हो या उद्देश्य छोटा हो लेकिन उद्देश्य होना जरूरी है इसलिए हम चाहते हैं कि आप रोजाना एक जैसा जीवन जिएं। हर दिन कुछ नया करने की कोशिश करें ताकि आप इस दौड़ में पीछे न रह जाएं।

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