SEO क्या है और कैसे काम करता है ?

चाहे आप पहले से SEO Professional हैं या अभी सीखना शुरू कर रहे हैं SEO शब्द का अर्थ और उसके पीछे का Mechanism बहुत बदल चुका है। गूगल कभी सिर्फ Web Pages या Web page के Keywords की प्रतिष्ठा को गिन कर Backlink को गिनकर वेबसाइट को एक Static rank दिया करता था। लेकिन अब गूगल Keywords और दस्तावेज़ की मात्रा नहीं बल्कि गुणवत्ता को चेक करता है और वेबसाइट को हर उपयोगकर्ता के लिए एक अलग गतिशील सीमा देता है।

ऐसे बहुत सारे मुफ्त और Paid course हैं जो आपको 3 महीने में Digital marketing या 30 दिनों में Digital marketing सिखा सकते हैं उतना काबिल नहीं हूं मुझे सिर्फ 11 साल के अनुभव है और मैं आपको अगले कुछ मिनटों में समझाने की कोशिश करूंगा कि Search engines कैसे काम करते हैं। SEO की Job के Parts क्या क्या होते हैं और आप कैसे एक ऐसी वेबसाइट को Manage कर सकते हैं बना सकते हैं जो Naturally और और Organically अच्छा Traffic लगातार उत्पन्न कर सके और आपको हर एक गूगल Algorithm update के बाद हिचकियां न आए।

Backlink क्या होती है किस टाइप की Backlink होनी चाहिए High DA PA backlinks क्या होती हैं ये या Schema data क्या बला है इन सारे सवालों के जवाब आपको इन्हीं Article में न सिर्फ मिल जाएंगे बल्की बाकी सब को भी समझा पाएंगे की SEO क्या है और कैसे काम करता है। Students के लिए जहां एक Basic SEO beginners tutorial होगा वहीं पुराने Professionals के लिए एक Refresher course की तरह काम करेगा।

सिर्फ ये एक Article पढ़कर आप SEO क्या है और कैसे काम करता है सिख पाएंगे। ये एक बहुत लंबा विषय है और ये सिर्फ सीखने की चीज नहीं है बल्कि अभ्यास करने की चीज है जो आप आनेवाले थोड़ी ही देर में सही से समझ पाएंगे। लेकिन इस Article को पूरा पढ़ने वालों को SEO के नाम पर कोई उल्लू नहीं बना पाएगा।

SEO क्या है ?

SEO का पूरा नाम Search Engine Optimization है। SEO एक Mix प्रक्रिया है। 50% तकनीकी और 50% रचनात्मक। आपमें से जो भी इस Article को पूरा पढ़ पाएंगे जितने भी होंगे उन्हें इस Article के लास्ट में मिलेंगे कुछ खास टिप्स। अपनी वेबसाइट को Low quality tags से बचाने के बारे में। गूगल Sites को Low quality, Medium quality और High quality जैसे श्रेणी में विभाजन करता है और ये विभाजन Automatically algorithms के जरिए भी होता है और Manual review के साथ भी हो सकता है।

गूगल आपको आपकी साइट की Category show नहीं करेगा कभी बस इस Article के लास्ट में हम बात करेंगे कि आखिर किन वजहों से किसी भी वेबसाइट को Low quality स्कोर मिलता है। और कैसे आप Low quality से अपनी वेबसाइट को बचा सकते हैं अपने Clients की साइट को बचा सकते हैं।

ज़रूर पढ़े: वडोदरा शहर की संस्कृति और इतिहास ? जानिए

SEO का काम क्या है ?

SEO के दो प्राथमिक उद्देश्य होते हैं

  1. Search engines को अपनी वेबसाइट तक सरलता से पहुँचने और समझने में मदद करना।
  2. वेबसाइट पर Useful Traffic लाना जो Convert हो सके ये रूपांतरण चाहे Sale हो sign up हो या कुछ और।

SEO की जॉब को कठोर बनाने वाली सबसे बड़ी जो गलतफहमी है वो ये है।

seo part

  1. आपको लगता है कि आप यहां पर हैं।
  2. और आपको यहां पर पहुँचना है।
  3. पर वास्तव में आपका काम जो है वो शुरू होता है यहां से जो वेबसाइट सबको दिखाई देती है वो ये है लेकिन SEO का काम सिर्फ इतना नहीं है ये भी SEO का काम होता है।

SEO के बारे में 6 ऐसे Myth जिन्हें आपको जानना चाहिए इन 6 कल्पित कथा के जाने बिना आप SEO के बारे में सही से समझ नहीं पाएंगे।

  1. Black hat SEO
  2. keyword density
  3. High DA do follow backlinks
  4. Duplicate content penalty
  5. Google ads या एडवर्ड से रैंक बढ़ती है
  6. SEO कोई काला जादू नहीं है ना ही लॉटरी मशीन है

BLACK HAT SEO

इससे पहले कि हम SEO क्या है और कैसे काम करता है इस पर विचार-विमर्श शुरू करें हमें कुछ ऐसी चीजों को समझना है जो सही नहीं है। SEO से सम्बंधित काफी सारे कल्पित कथा हैं जिनको लोग कई बार. बार-बार Repeat करते रहते हैं उसके नाम पर उल्लू बनाते रहते हैं या तो वो कभी सही थे ही नहीं या अब Relevant नहीं है।

इस सूची में जो सबसे पहला नाम है वो है Black hat SEO. क्या होता है Black hat SEO. SEO भी एक Profession है। कभी आपने Black hat डॉक्टर सुना है कभी कोई Black hat पायलट देखा है कोई Black hat एक्टर देखा आपने। फिर Black hat SEO कैसे आ गया सिर्फ एक प्रक्रिया होती है जिसे कहते हैं SEO और बाकी सब Web spam है।

मैं हां Matt Cutts के बातो को उधार ले रहा हूं। उन्होंने एकदम सही कहा था कोई भी टेकनीक जो खुद को Black hat SEO होने का दावा करती है वो मूल रूप से Web spam है। ये Black hat SEO के नाम की गलत धारणा की वजह से ही लोगों ने SEO को काला जादू बना के रखा हुआ है। जब कोई उम्मीद Web spamming technics का उनको जब कोई शक्ल नहीं मिलता है तो वो Black hat SEO नाम की टोपी पहना देते हैं।

KEYWORD DENSITY

keyword density जैसा कोई Concept अब काम नहीं करता है। गूगल के बेहद शुरुआती समय में गूगल में भी Keywords को एक निश्चित समय रिपीट करने से Impress हुआ करता था लेकिन अभी वर्ष 2020 में ऐसा कुछ भी नहीं है और असल में keyword density पर लोग ज्यादा Focus करते थे तब भी अधिकतर लोग keyword density को कैलकुलेट नहीं कर पाते थे।

अगर कोई 100 Words के Document में कोई keyword 5 बार Repeat हो रहा है तो keyword density 5% नहीं होती है गणित जो है वो थोड़ी ज्यादा Technical है और अगर आप इसके बारे में जानना चाहते हैं तो TFIDF को सर्च कर सकते हैं। परंतु इसका अभी कोई अर्थ नहीं है।

HIGH DA DO FOLLOW BACKLINKS

Backlinks जरूरी है कल भी थी आज भी है और आगे भी रहेगी लेकिन DA यानि Domain authority सिर्फ एक कंपनी Moz का आकृति है। इसका गूगल के लिए कोई अर्थ नहीं है और दूसरा Do follow या No follow Instruction को गूगल ने सितंबर 2019 से आरंभ की जगह सुझाव मानना शुरू कर दिया था। मतलब अगर कोई वेबसाइट किसी लिंक के साथ No follow tag देती है या Do follow tag देती है उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

गूगल खुद तय करेगा कि उसे Page rank पास करनी है या नहीं, और ये हमें दूसरे Point पर लेकर आता है कि Backlinks की महत्त्व DA PA से तय नहीं होती है। Relations से डिसाइड होती है। यहीं गूगल पर ऐसे ब्लॉगर प्रतिभाशाली लोग बैठे हैं जो tp link router कंपनी के फोरम पर या Microsoft answer, Yahoo answers के फोरम पर प्रोफाइल से Do follow Backlinks बनाने का आइडिया दे रहे हैं।

गूगल हर साल दुनिया की सबसे Brilliant Software Engineers को मोटी सैलरी और फ्री के खाने पर इसलिए नहीं हायर करता है कि tp link से प्रोफाइल जो Backlinks मिल रही हैं उनसे उल्लू बन जाएगा। ऐसी Backlinks से ही आपकी वेबसाइट की बेड़ा गर्क होता है।

DUPLICATE CONTENT PENALTY

गूगल ने कभी भी कोई भी Duplicate content penalty नहीं निकाली थी। फर्क सिर्फ इतना है कि अगर आप तीन Pages पर एक ही Content का उपयोग कर रहे हैं तो गूगल 3 में से सिर्फ 1 को ही रैंक करेगा चूंकि आपके 3 Pages एक दूसरे के साथ ही एक ही स्‍पॉट के लिए फाइट कर रहे हैं तो आप अंत में अपना ट्रैफिक ढीला करते हैं Rank loose करते हैं। इसलिए Canonical text उपयोग किए जाते हैं ताकि आप गूगल को बता सकें कि इन Pages के जो Content में वो एक जैसा है।

यहां पर एक बात ध्यान रखिये कि डुप्लिकेट कंटेंट एक बात है और किसी और वेबसाइट से पूरा कंटेंट उठाकर अपनी साइट पर लगातार पोस्ट करते रहना एक पूरा अलग चीज है। इसे Scripting बोलते हैं इसपर Manual action होता है और गूगल से आपकी वेबसाइट De index हो सकती है Demote हो सकती है इससे बचना चाहिए आपको।

GOOGLE ADS या एडवर्ड से रैंक बढ़ती है ?

ये शायद सबसे बेवकूफ Myth है Organic search result अलग होते है। Page ads completely अलग चीजें है दोनों की Different Policies हैं दोनों के विभिन्न Scenarios है। गूगल और उसकी मूल कंपनी Alphabet की Market value One trillion dollars से ज्यादा है। उसको आप अपने ऐड बजट से नहीं खरीद सकते उसको रिश्वत नहीं दे सकते ऐसा मुमकिन नहीं है।

SEO कोई काला जादू नहीं है ना ही लॉटरी मशीन है

लोग डायलॉगबाजी करते हैं कि भाई जल्दी से मैं ये बता रहा हूं उसको जल्दी से वहां पर जाके Backlinks बना लो वरना फिर Opportunity निकल जाएगी। निकल जाने दो ऐसी Opportunity को निकल जाने दो। वो सिर्फ अपनी वेबसाइट Demote नहीं करवा रहा आपकी भी करवा देगा।

या कुछ छुपे हुए रईस होते हैं जो दावा करते हैं कि वे SEO से हर महीने 50 हजार डॉलर या 12 लाख कमा रहे हैं। जब भी कोई कहे आवो मैं तुम्हें ऐसा तरीका बताता हूं जिससे मैं इतने रुपए कमा रहा हूं चलो तुम्हे भी कमाने का तरीका बता देता हूं तो चप्पल छोड़कर भाग लीजिए 101% Spam है। अगर किसी को वास्तव में ऐसा तरीका पता है तो किसी और को नहीं बताने वाला।

SEO के काम के 8 बड़े पार्ट होते है ?

  1. Website user experience
  2. Server/domain management
  3. Website accessibility checkup
  4. Setting up tools from Google/Bing/and so on.
  5. Keyword research
  6. Content planning and publishing
  7. Structured data implementation/testing
  8. Backlinks earning/analysis

WEBSITE USER EXPERIENCE

सबसे जरूरी और शायद सबसे ज्यादा नज़रअंदाज़ किया जाने वाला पार्ट यही है। सबसे ज्यादा नज़रअंदाज़ किए जाने वाला इसलिए क्योंकि SEO किसका कर रहे आप वेबसाइट का। गूगल को हम छेड़ नहीं सकते हैं वेबसाइट को ही Rank करना होगा। अगर वेबसाइट का डिजाइन सही नहीं होगा उसमें आने वाला यूजर जो है वो उसको जानकारी नहीं मिलेगी तो दोबारा नहीं आएगा।

किसी भी वेबसाइट में उपयोग किए जाने वाले सबसे 3 Important factor होते हैं।

  • Required information
  • Speed of the webpage
  • Design of the website

Required information: अगर आपकी वेबसाइट किसी भी पकवान बनाने की विधि के बारे में हैं और विजिटर को वेबसाइट में लैंड करने के बाद पहले आपकी लाइफ स्टोरी पढ़ने को मिलती है। और Recipes की पेज सबसे अंतिम में कहीं पर है तो ये Bad User experience है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी वेबसाइट कितनी फास्ट है। सबसे फास्ट तो Blank Page HTML वाला होता है उसका क्या करेगा कोई। अपनी वेबसाइट को एक विजिटर की तरह विजिट करके देखिए कि क्या आपका पेज वो Information जल्दी से जल्दी Provide कर रहा है जो आपके विजिटर को चाहिए अगर नहीं तो Region पता करिए और समाधान करिए।

बहुत सारे ऐसे लोग होते हैं जो Slider के पीछे बहुत परेशान होते हैं। उल्टे सीधे बैनर डिजाइन करवाते हैं। यूजर को आपके बैनर में 99.9% कोई Interest नहीं होने वाला है बेकार में पेज को स्लो बनाएगा और जगह भी खायेगा। डिजाइन सिम्पल होना चाहिए। Button tap करने में आरामदायक होने चाहिए और टेक्स्ट पढ़ने में आसान होना चाहिए। वेबसाइट का Mobile friendly होना अनिवार्य है। वेबसाइट का Responsive होना अनिवार्य है।

Speed of the webpage: आजकल आप हर दूसरे ब्लॉग पर वीडियो में देखेंगे कि लोग वेबसाइट की स्पीड बढ़ाने की बात कर रहे हैं जो कि एकदम सही है वेबसाइट फास्ट होनी चाहिए। पर क्या आप जानते हैं कि वेबसाइट फास्ट होने से SEO में कोई Direct benefit नहीं मिलता है। आपकी वेबसाइट की स्पीड अगर 100 है Page speed ​​in sites पर तो आपकी रैंक 1% भी Benefit नहीं पाएगी। सवाल है कि फिर वेबसाइट की स्पीड पर इतना फोकस क्यों करते हैं सबलोग। मूल रूप से गूगल स्लो वेबसाइट को Punish करता है इसलिए ये रेस उलटी है।

रेस दो तरीके की होती है पहली वो मैदान वाली रेस जो सबसे पहले पट्टी को टच करेगा वो जीतेगा। और दूसरी रेस होती है शेर वाली जो सबसे पीछे रह जाएगा उसे शेर खा जाएगा। इसलिए वेबसाइट का फास्ट होना जरूरी है क्योंकि अगर आप की वेबसाइट की स्पीड सबसे कम है तो गूगल आपकी रैंक को कम कर सकता है। गूगल वेबसाइट की स्पीड पर फोकस इसलिए करता है क्यूंकि अगर वेबसाइट की स्पीड ज्यादा होगी तो यूजर को वेबसाइट लोड होने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा ।

इसलिए गूगल मूल रूप से आपको वेबसाइट की स्पीड बढ़ाने के लिए डरा रहा है ताकि आपका ही यूजर इंतज़ार न करता रह जाए। क्योंकि Google को पता है कि आप खुद वेबसाइट की जो यूजर हैं उसकी चिंता नहीं करेंगे आपको सिर्फ Ranking चाहिए।

Design of the website: गूगल आपसे उम्मीद करता है कि जो पेज का Important content है वो इस Above the fold पार्ट में हो। 2012 में गूगल ने एक पेज लेआउट Algorithm रिलीज की थी जिसके बाद से ऐसे पेज जिनमें सबसे अधिक भाग में बेकार की Content होता है या सिर्फ बड़ी सी इमेज होती है कोई संपर्क जानकारी नई होती है। या कंटेंट में बहुत सारा हिस्सा सिर्फ विज्ञापन Show कर रहा है।

तो आपकी वेबसाइट की Ranking गिर जाएगी वेबसाइट का जो प्राथमिक सबसे महत्वपूर्ण Content है वो Above the fold एरिया में रहना चाहिए और ज्यादा विज्ञापन नहीं होने चाहिए इस एरिया में वेबसाइट Actionable होनी चाहिए। वेबसाइट यूजर को Record information जल्दी से जल्दी देने वाली होनी चाहिए। वेबसाइट फास्ट होनी चाहिए वेबसाइट Mobile responsive से होनी चाहिए।

वेबसाइट का जो जरूरी कंटेंट है वो Above the fold एरिया में होना चाहिए। वेबसाइट में ऐसा कोई Popup नहीं होना चाहिए जो यूजर को वेबसाइट विजिट करने से रोके और Exit intent popup अभी उपयोग किए जा सकते हैं। अभी उनसे गूगल को कोई Problem नहीं है।

SERVER/DOMAIN MANAGEMENT

Server: डोमेन और सर्वर मैनेजमेंट वेबसाइट बनाना डिजाइनर और डेवलपर की ज़िम्मेदारी है। जिसमें SEO सिर्फ मार्गदर्शक कर सकता है लेकिन सर्वर और डोमेन मैनेजमेंट SEO की जॉब का प्रथम रोल होता है। जैसा कि मैंने इस Article की शुरुआत में कहा था SEO का मुख्य काम है Search engines को वेबसाइट तक पहुंचने में मदद करना जब कोई यूजर Search result पेज में आपकी वेबसाइट के एक लिंक पर क्लिक करता है या ब्राउजर में आपकी वेबसाइट के URL को टाइप करके बटन दबाता है जो सबसे पहली Request Browser से जाती है वह दी जाती है।

आपके Domain registrar के पास। जहां से आपने अपना डोमेन खरीद किया था। वहीं पर आपको होस्टिंग अकाउंट के Name servers ऐड होते हैं। Domain registrar ब्राउजर को Name servers की जानकारी देता है जो ब्राउजर को बताता है कि आपकी वेबसाइट आखिर के सर्वर पर है और फिर उस सर्वर से Files को डाउनलोड करके Browser वेबसाइट को Render करके आपके विजिटर को दिखाता है।

इस पूरी प्रक्रिया में कहीं पर भी कोई भी समस्या होगा तो आपकी वेबसाइट या तो धीमी लोड होगी या फिर लोड नहीं होगी। Name servers हमेशा Minimum दो होते हैं और ऐसा इसलिए होता है ताकि अगर एक सर्वर फेल हो जाए या डाउन हो जाए या स्लो हो जाए तो दूसरा सर्वर है वो काम संभाल ले और आपकी वेबसाइट डाउन न हो।

Domain management: Majority of the Hosting Companies अपने hosting plan में Cpanel को जरूर मेंशन करती हैं और Cpanel एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसके जरिए आप अपने होस्टिंग सर्वर को मैनेज करते हैं।

SEO के लिए Cpanel में जो सबसे ज्यादा काम आने वाले 3 Option होते हैं।

  1. Zone editor
  2. SSL/TLS
  3. File manage

Zone editor: Zone editor आपको A record, C name, AAA, TXT, और MX record बनाने की सुविधा देता है।

SSL/TLS: SSL/TLS आपको अपनी वेबसाइट के SSL certificate समस्या का समाधान करने में मदद करता है। और असल में आप SSL tool से फ्री में SSL certificate को Install कर सकते हैं Uninstall कर सकते हैं और अपडेट भी कर सकते हैं।

File manage: File manage आपको Files को Directly handle करने का विकल्प देता है। File manage के साथ अगर आप Comfortable होंगे तो आपकी बहुत सारे जो कार्य हैं आप आसानी से कर सकते हैं। जैसे कि वेबसाइट को दूसरे डोमेन में ट्रांसफर करना। एक वेबसाइट को एक होस्टिंग से दूसरी होस्टिंग में ट्रांसफर करना। कितने सारे ऐसे लोग इस विंडो पर नहीं आना चाहते हैं ये काफी हेल्पफुल हैं।

अगर आपको अपनी Robots.txt में कुछ परिवर्तन करना है। यहां पर आप Root folder में अपनी Robots.txt को एडिट कर सकते हैं एक बैकअप बनाने के बाद। non www url को www url पर में Permanent redirect करना है इसकेलिए आप HTX फाइल को एडिट कर सकते हैं।

WEBSITE ACCESSIBILITY CHECKUP

Website accessibility checkup का जरूरी सर्च इंजन के लिए वही है जो वास्तविक मानव के लिए User experience का है चाहे आपकी वेबसाइट अभी अभी डेवलप हुई हो या पहले से चल रही हो और आपको अभी अभी SEO project के लिए मिली है आपको कुछ जांच करने जरूरी हैं।

  1. Robots.txt
  2. Sitemap

Robots.txt: गूगल या जितने भी जरूरी सर्च इंजन कॉलर्स हैं वो जब भी आपकी वेबसाइट को विजिट करेंगे सबसे पहले robots.txt को देखेंगे और उसके Instructions का पालन करें करेंगे। ये एक बहुत ही छोटी सी और बहुत ही महत्वपूर्ण फाइल है। robots.txt आपकी वेबसाइट के रूट फोल्डर पर होती है और हर वेबसाइट की robots.txt फाइल का लिंक एक ही होता है। उदाहरण के लिए edmedno.com/robots.txt गूगल के robots.txt से जुड़े हुए कुछ सास नियम है जिनको पालन करना जरूरी है।

Sitemap: sitemap दो तरह के होते हैं .xml और .html XML के लिंक को आप Search console में सबमिट कर सकते हैं और HTML sitemap सिर्फ वेबसाइट पर होता है इसको Submit नहीं करना होता। HTML sitemap एक सिंपल HTML पेज होता है जिसमें वेबसाइट्स के सारे Pages के लिंक हाइपर लिंक होते हैं जिसे एक नया यूजर किसी भी पेज को ढूंढ सकता है। XML sitemap एक XML फाइल है जिसमें आपकी वेबसाइट के लिंक्स होते हैं वो One by one पड़े हुए होते हैं। यकीन नहीं होता तो गूगल माई बिजनेस का साइट मैप देखने के लिए विजिट करते हैं www.google.com/business/sitemap.xml पर।

SETTING UP TOOLS FROM GOOGLE/BING/AND SO ON.

Google search console: कुछ Basic tools जिनसे हमें अपनी वेबसाइट को जरूर लिंक करना चाहिए वो है। Google search console, Google analytics और Bing web master tool. गूगल सर्च कंसोल एक टूल है जो गूगल को पुष्टि करता है कि इस फलांना वेबसाइट का जो असली मालिक वो ये व्यक्ति है। और गूगल को आपकी वेबसाइट में कोई संकट नजर आएगी चाहे वो आपकी वेबसाइट में पड़ा हुआ Virus हो या कोई Server error, Crawling error, Schema data error या Performance related issue है तो गूगल आपको ईमेल करके बता सकता है।

Google analytics: आपकी वेबसाइट का ट्रैफिक, उसके स्रोत, उसके पैटर्न, उसके व्यवहार के बारे में जानकारी देता है।

Bing: अगर आपकी वेबसाइट Search console के साथ Linked है तो Bing आपको अपनी वेबसाइट को सीधे लिंक करने की सुविधा प्रदान करता है। Bing Webmaster console को बहुत सारे SEO और विशेष रूप से नए SEO महत्त्व नहीं देते हैं। पर हमेशा Bing को भी यूज करने का सुझाव देता हूं और इसके दो रीजन है।

  1. SEO एक Process है और गूगल इस Process का एक अंश है। भारत में Google Search engine मार्केट में 98.8% कवर करता है। Bing लगातार नए Tool को प्रक्षेपण कर रहा है और काफी सारे साधन Web masters के ला रहा है। इसलिए Bing को नज़रअंदाज़ मत करिए।
  2. एक बार आप अपने Nesh में ऊपर आ जाते हैं तो फिर Bing आपको अपने Competition से थोड़ा सा आगे निकलने का मौका देता है। SEO का काम Meaningful traffic को वेबसाइट तक लेके आना है और अगर आपको Bing 1% भी Traffic provision कर सकता है तो अच्छा है वो 1% भी आपके लिए जरूरी है। आपको बहुत काम नहीं करना पड़ेगा यहां पर और आपको परिणाम जल्दी मिलेंगे ज्यादा मिलेंगे।

KEYWORD RESEARCH

keyword सर्च का आधार है। आप जो भी keyword उपयोग करते हैं किसी सर्च के लिए उसी के आधार पर गूगल या कोई भी सर्च इंजन आपको सर्च परिणाम प्रदर्शन करता है। गूगल ने काफी पहले से keyword के साथ उपयोगकर्ता की लोकेशन और प्रोफाइल को देखे Customize करना शुरू कर दिया था। पर Google algorithm को सर्च में इस्तमाल हो रहे Word और Faces को ज्यादा सही से समझने में मदद करती हैं।

keyword research के साथ Intent research भी एक ब्रांच अभी निकल कर आना शुरू आना शुरू हो गए जिसमें SEO उस keyword की Intent को भी ये डिवाइस कहते हैं, कि वो Informational, Commercial है या Entertainment के लिए है। keyword research में हम दो आंकड़े को ढूंढते हैं। नंबर वन लोग किस keyword को Search कर रहे हैं और नंबर दो कितने लोग उस Word को Search कर रहे यानि की उसका Search Volume कितना है मान लिया जाये की आप Best dentist विशाखापट्नम के लिए रैंक करना चाहते है।

एक बंदा है जो विशाखापट्नम के किसी क्षेत्र में है और उसके दांत में दर्द हो रहा है, वह Best dentist नहीं चाहता है। वो ऐसा Doctors चाहता है जो उस विशेष समस्या का इलाज करता हो जो जिसके उपलब्ध होने का समय है उसकी वेबसाइट पर हो और अगर मुमकिन हो तो उसके Rates भी वेबसाइट पर उल्लेख हो जिससे वो तुलना करके उनके पास जा सके इसलिए बेस्ट फैलाना ढिमाका ये सब keyword नहीं है।

keyword के Ideas, Search volume और Competition की जानकारी के लिए जो Tools आप उपयोग कर सकते हैं उनमें से कुछ अच्छे विकल्प हैं।

  • गूगल का अपना Keyword Planner
  • Ahrefs keyword search tool
  • Moz keyword search tool
  • Keyword everywhere
  • keywordtool.io | हिंदी keyword research tool
  • WMS Keyword everywhere

CONTENT PLANNING AND PUBLISHING

कई बार आपके मन में ये प्रश्न होता है कि हमने भी गूगल की सारी Policies का पालन कर लिया, वेबसाइट भी सही कर लिया और कंटेंट भी एकदम सही keyword को Target करके वेबसाइट में ब्लॉग में पब्लिश कर दिया। पर फिर भी हमारी वेबसाइट को Traffic नहीं मिल रहा है अभी भी उसकी रैंक Improve नहीं हो रही है। थोड़ा Confusing लग सकता है आपको, लेकिन नई वेबसाइट्स के सारे प्रयास करने के बाद भी सही keyword पर रैंक नहीं कर नहीं कार पाती है वो क्योंकि आप जिन keywords के लिए Content Publish कर रहे हैं उसपर Authority वेबसाइट्स काफी पहले से Content Publish कर रही हैं जिसे गूगल खोज परिणाम में दिख रहा है और Users content को पढ़ भी रहा है।

कल्पना कीजिए की आप एक विकिपीडिया जैसी कोई वेबसाइट बना लेते हैं और उसमें भी हर Celebrity या शहर के बारे में विकिपीडिया की तरह जानकारी प्रदान करते हैं Publish कर देते हैं। इसका मतलब ये नहीं कि गूगल आपकी वेबसाइट को विकिपीडिया से ऊपर रैंक देना शुरू कर देगा। इसका Region सरल है User invitation. विकिपीडिया पहले से ही Contents प्रदान कर रही है। गूगल के पास आपकी नई नवेली वेबसाइट को Try करने का कोई Region नहीं है। उपयोगकर्ता विकिपीडिया को पहले से जानता है उसके पथ प्रदर्शन को जानता है Search function को जानता है जानकारी भी ठीक ठाक है तो गूगल उपयोगकर्ता को विकिपीडिया से ही खोज परिणाम दिखाता रहेगा।

अगर आप चाहते हैं कि आपकी नई वेबसाइट अपनी Industry में अच्छी रैंक हासिल करे तो सबसे लोकप्रिय keyword पर Authority website से Direct fight करने की जगह Latest related topics को ढूंढना शुरू कर दीजिए। जिस पर अभी Authority या बड़ी वेबसाइट्स पर कंटेंट उपलब्ध नहीं है और अच्छा Content provide करने का विकल्प आपके पास विकल्प हो जाता है।

STRUCTURED DATA IMPLEMENTATION/TESTING

Structured data आपकी वेबसाइट की जानकारी को समझने में Search engines की मदद करता है। गूगल की इकलौती शर्त ये है कि जो भी डाटा आप Schema types या Structured data स्वरूप में दिखा रहे हैं वो उस पेज में Really में सब कुछ Visible होना चाहिए दिखाई देना चाहिए। उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि आपकी वेबसाइट एक एडवोकेट के ऑफिस के बारे में और आप लोकल बिजनेस का Schema data इस वेबसाइट में होम पेज के लिए उपयोग करना चाहते हैं जो आप बिल्कुल इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन आपको हर पेज में Schema data को जोड़ने की जरूरत नहीं है।

BACKLINKS EARNING/ANALYSIS

Backlinks आपकी वेबसाइट के किसी भी पेज को मिलने वाला एक लिंक है। मान लेते हैं कि आपकी वेबसाइट tanvish.in है। तो जब भी किसी दूसरे वेबपेज पर tanvish.in को हाइपर लिंक दिया जाएगा तो आपकी उस वेबसाइट के लिए उसमें पेज के लिए लिंक हो जाएगा। गूगल के संस्थापकों ने इन Backlinks को काउंट करके तय करना शुरू किया कि कौन सी वेबसाइट इम्पॉर्टेंट है किस वेबसाइट की Rank ज्यादा है और किसकी कम इस रैंकिंग प्रणाली को पेजरैंक कहा जाता था। SEO कि शुरुआती दौर में लोगों ने ये Figure out कर लिया कि अगर Backlinks से पेजरैंक बढ़ती है तो ज्यादा से ज्यादा Backlinks बनानी चाहिए।

Backlinks बनाते समय आपको ये ध्यान रखना चाहिए की आपकी वेबसाइट के लिए Relation हो। उदहारण के लिए अगर आपकी खुद की वेबसाइट Dentist की है और आप Hardware tool के फोरम पर बना रहें हैं। तो गूगल इतना तो समझता है की डॉक्टर साहब हथौड़े से दांत नहीं तोड़ेगे। ये SEO नहीं बल्कि सिर्फ रैंक बढ़ने के लिए बनाई है। इसीलिए हमेसा Relation से ही वेबसाइट बनाये। मैं उम्मीद करता हूं की SEO क्या है और कैसे काम करता है इस बारे में जानकारी आपको मिल गई होगी अगर अच्छा लगा तो शेयर जरूर करे धन्यवाद।

Related blog posts